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जागते रहो हम खाने के लिए जागते हैं, कमाने के लिए जागते हैं, मनोरंजन के लिए जागते ही रहते हैं लेकिन अत्याचार होते देख सो जाते हैं, यदि हम कर्तव्यों के लिए जाग जायें यदि हम ग़लत होते देख चुप ना रहें तो कहीं कुछ बदलने की शुरुआत तो अवश्य होगी. जुल्म सहने से जालिम की मदद होती ही है. भले ही हम ये सोच कर चुप रहते हैं की जुल्म पड़ोसी पर हो रहा है हमें क्या. इसलिए जागते रहो...जागते रहो.आगे पढ़ें... 

हम करें तो चोरी और वो करें तो...
ये आंक्लित खपत क्या है? बिजली घर में एक सज्जन ने मुझसे पूछा तो मैंने उसे बताया कि जो लोग चोरी कर के ... samshad ahmad द्वारा 10 मई, 2008 12:42:00 AM IST पर पोस्टेड
कनेक्शन
सुरेश ने जब यह सुना कि बिजली घर वाले बिना परेशान किये तुरंत नये घरेलू कनेक्शन दे रहे हैं तो उसकी ... samshad ahmad द्वारा 23 अप्रैल, 2008 12:40:49 AM IST पर पोस्टेड
कहानी लिखो और जीतो दस लाख रुपये
ब्लॉगर बंधुओं के लिये सुखद सूचना! पेन उठाओ बॉलीबुड हिलाओ अगर आप कहानी लिखने के शौकीन हैं तो कहानी ... samshad ahmad द्वारा 1 मई, 2008 5:51:00 PM IST पर पोस्टेड